Types of Industrial Hazard in Hindi

औद्योगिक सुरक्षा प्रणाली में सुरक्षित उत्पादन व कर्मचारियों को सुरक्षात्मक माहौल पैदा करना। सम्भावित खतरों का विश्लेषण करना तथा उन्हें हटाना Types of Industrial Hazard in Hindi

भूमिका :

औद्योगिक कार्य प्रणाली में होने वाली दुर्घटनाओं व उनका प्रभाव व्यक्ति व देश पर व समाज पर मानव की आवश्यक ज़रूरतों के लिए बढ़ते औद्योगिकरण के कारण होने वाले विभिन्न खतरों जैसे :- भौतिक रासायनिक, मैकेनिकल, सामाजिक, पर्यावरणीय मानवीय आदि खतरों का आंकलन कर उनको हटाना- Types of Industrial Hazard in Hindi

Types of Industrial Hazard in Hindi

 

  • Ergonomics Hazards
  • Chemical Hazards
  • Mechanical Hazards
  • Biological Hazards
  • Physical Hazards
  • Social Hazards
  • Environmental Hazard

आपदा या खतरे औद्योगिक कार्य स्थलों में विभिन्न गतिशील परिस्थितियों के एक दूसरे के सम्पर्क में आने व उनमें अवरोध के कारण उत्पन्न होते है जिनका प्रभाव विपरीत व हानिकारक होता है। इनमें चोट लगना, सम्पति नुकसान व अन्य नुकसान सम्मिलित है।

खतरे की परिभाषा Definition of Hazards :

खतरा या संकट वह है जो सामान्य कार्य प्रणाली से हटकर हो तथा उसका परिणाम चोट, मृत्यु या सम्पति का नुकसान हो। ये खतरे कहलाते है। संकट प्रवन्धन के तीन मुख्य तत्व है :

  • (1) संकट की प्रवृति को पहचानना Recognisation
  • (2) जोखिम के प्रभाव का निर्धारण Evaluation
  • (3) नियंत्रण Control

खतरों के प्रकार (Description of Hazards)

1- भौतिक खतरे Physical Hazards :

मानव का कार्य स्थल पर भातिक चातावरण या – भौतिक परिस्थितियों में परिवर्तन व उसके साथ उचित सामंजस्य नहीं बिठाने के कारण उत्पन्न होता है। इसमें हम विभिन्न परिस्थिति द्वारा उनको पहचान कर उनका विश्लेषण कर कार्य स्थल से हटा सकते है- Types of Industrial Hazard in Hindi

भौतिकीय खतरों के प्रकार Type of Physical Hazards :

1- ध्वनि (Noise)

यह सबसे पहला भोतिक खतरा है आरोह व अवरोह क्रम की ध्वनि के कारण हृदय धड़कन अनियंत्रित होना बहरापन आदि खतरे उत्पन्न होना। कारण Causation अत्यधिक आवाज के कारण उद्योग में उपकरणों की कार्य प्रणाली के दौरान अधिक, अवरोध, घर्षण, दबाव आदि से उत्पन्न होता है। ध्वनि को मापने की इकाई डी.बी. (DB) होती है। 8 घंटे काम करने में 80 से 90 डी.बी. होती है।

नियन्त्रण विधि उपाय Control Measurement |

  • बन्द केबिन में रहना Closed Cabins
  • ध्वनि रोधक सामग्री का उपयोग Sound absorbing materials
  • कर्मचारियों की अदला बदली Rotation of Personnel
  • कान पर परत लगाना Earmuff
  • कान में अंगुली डालना Ear plug

2- कम्पन्न (Vibration)

यह शरीर के सभी अंगों को प्रभावित करता है। यह यांत्रिक दोष के कारण उत्पन्न होता है तथा यांत्रिक पुर्जे व इनकी कार्य प्रणाली के आपस में सम्पर्क से भी उत्पन्न होता है।

कारण Cause

(i). यांत्रिक दोष के कारण Mechanicals fault Problems

(ii) उत्पादन कार्य प्रणाली के पुों में खराबी के कारण

नियंत्रण के उपाय (Ways to control )

(i)समय-समय पर देखरेख mechanicals fault problems

(ii) पुराने या खराब पुजो को बदल कर Replacement of work out part

(iii) आवश्यकता पड़ने पर पुर्व निर्धारित रखना Protective Maintenance and Replacement

3- तापमान (Temperature)

अत्यधिक व कम तापक्रम अधिक या कम शुष्क तापक्रम जो मानव को कार्य स्थल पर प्रभावित करता।

कारण (Reasons)

1. यांत्रिक संचालन.  के कारण ताप के विकिरण

2. हवा के आवागमन की उचित प्रणाली के अभाव से।

3. अनुपयुक्त उष्मा के आवागमन से।

नियन्त्रण के उपाय (Control) :

(1) तापक्रम रोधी या नियंत्रक छतों व दिवारों की व्यवस्था Air washer/insulating

(2) हवा के आवागमन व उष्मा की निकासी के उचित माध्यम Proper Air Circulation

4- दबाव (Pressure)

अधिक या कम प्रेशर वाली प्रणाली के उपयोग के कारण दबाव का उचित रूप से कार्य स्थल पर विभिन्न प्रणालियों में उपयोग होता है जिसमें वायुदाब, ठोस दाब इनका सही ढंग से समायोजन व संतुलन नहीं होने से दुर्घटना की सम्भावना होती है।- Types of Industrial Hazard in Hindi

नियन्त्रण के उपाय (Methods to control)

  1. उचित व सुरक्षित दाब प्रणाली स्थापित करना।
  2. इसके समुचित सुरक्षा उपायों को ध्यान में रखना।

5- विधुत (Electricity)

विद्युत के अवरोध व असुरक्षित कार्य प्रणाली से खतरे उत्पन्न होते है।

कारण (Reasone)

1.खुले विधुत सर्किट होने से।

2.अनुपयुक्त विधुत व्यवस्था होने से।।

3. विधुत की उच्च तनाव प्रणाली व समुचित सुरक्षा का अभाव होने पर

4.खुले व इधर-उधर बिखरे तार

5.अधिक भार Heavyload

नियंत्रण के उपाय (control)

कार्य स्थल पर विधुत नियमों अनुसार कार्य करना।

1.पूरी तरह अर्थिग करना।

2.सर्किट बोर्ड की व्यवस्था करना

3.विद्युत संबंधी कार्य करते समय व्यक्तिगत सुरक्षा प्रणाली का प्रयोग करना।

4.उचित सुरक्षा प्रणाली।

6- प्रकाश व्यवस्था Lighting arrangement

कार्य स्थल पर समुचित प्रकाश की व्यवस्था होना आवश्यक है। इसके अवरोध का कारण उचित प्रकाश व्यवस्था न होना- Types of Industrial Hazard in Hindi

Cause कारण :

1-अधिक चमक युक्त प्रकाश

2-प्रकाश में एक रूपता का अभाव

3-कार्य स्थल अंधकार मय होना

4-प्रकाश के विकिरणीय प्रभाव

5-विभिन्न रंगों की प्रकाशीय व्यवस्था

नियंत्रण (Control):उचित प्रकाश की व्यवस्था

2-रासायनिक खतरे- Chemical Hazards 
  • औद्योगिक विकास व नये-नये उत्पाद व उत्पादन प्रक्रिया में आज अधिक से अधिक रसायना का प्रयोग होने लगा। यह रसायन कार्य के दौरान कर्मचारी को परेशान करते है। पर्यावरण, जीव जन्तु को प्रभावित करते है। बिना उचित जानकारी से इनके उपयोग बड़ी दुर्घटना उत्पन्न कर सकता है- Types of Industrial Hazard in Hindi

रासायनिक खतरों की परिभाषा Definition of Chemical Hazards

एक रासायनिक खतरा वह आपदा जो मानव सम्पर्क में आने पर जीवन व स्वास्थ्य पर गलत प्रभाव डालें। यह एक रासायनिक परिवर्तन की क्रिया इसमें ज्वलनशील पदार्थ, ताप की आवश्यकता होती है। पदार्थ की ऑक्सीजन की प्रक्रिया के साथ होती है।

कारण (Cause)

  1. ज्वलनशील तरल ठोस पदार्थ के द्वारा
  2. HSD/LSHS-L.P.G. तरल प्रकृति पेट्रोलियम के द्वारा
  3. Hydrogen के द्वारा
  4. Short Circuit Inelecticalgyst नियंत्रण

नियंत्रण (Control)

  1. उचित अग्निरोधी प्रबन्ध
  2. देखरेख कार्य स्थल पर
  3. पीपीई
  4. आग व विस्फोटक के जोखिम के प्रयासों का आंकलन व सुरक्षा प्रबंधन

जहरीला रसायन (Toxic Chemical)

  1. Chemical Flame आग
  2. Chemical Dust धुल
  3. Fumear गंध

रासायनिक सुरक्षा (Chemical Safety)

विकासशील देशों में रसायनों से उत्पन्न दुर्घटना की दर सामान्य से ज्यादा होती है। रसायनों को उनके गुणों के आधार पर वर्गीकृत करना ताकी एक जगह से दूसरी जगह ले जाते समय सावधानी रहें। खतरों की सम्भावना न हों। यह वर्गीकरण ही इन रसायनों के मुख्य खतरों व उनके बचाव के तरीकों तथा उनके सुरक्षित वातावरण के लिए आवश्यक है – what is hazard

  • Class -1:- Explosive विस्फोटक पदार्थ
  • Class -2: Gases :-गैस
  • Class -3: Flammable liquid ज्वलनशील तरल पदार्थ
  • Class -4: Flammable solid ज्वलनशील ठोस पदार्थ
  • अचानक आग पकड़ने वाला
  • ज्वलनशील ठोस
  • जल के प्रभाव में आने परे
  • Class -5: General Items
  • Class -6: Poisons जहर

जहरीले प्रभाव (Toxicity) :

रसायनों के बढ़ते हुए प्रभाव व उपयोग के कारण मानव पर उत्पन्न दुष्प्रभाव जो देखें जाते है। उसे जहरीकरण या विषैलीकरण कहते है। यह अध्ययन हमें रसायनों के सुरक्षित उपयोग करने की विधियों व उनके भण्डारण और उनके साथ व्यवहार की प्रक्रिया की परिभाषित करता है। CS इसके दुष्प्रभावों को वर्गीकृत किया गया है – hazard kya hai

Types of Industrial Hazard in Hindi

  1. Traumatic शारीरिक दोष को
  2. Auergic शारीरिक वृतीक्रिया
  3. Careingonic केंसर की बीमारी का
  4. Mutagenic टयुमर पैदा करता है
  5. Asthysiants दम घुटना
  6. Irritants (Corrsives) चर्म रोग
  7. Systemic Poison पाचन क्रिया
  8. किड़नी, लीवर

रसायनों का भण्डारण (Storage of Chemical)

रसायनों का भण्डारण कम या ज्यादा मात्रा किया जाता है। इसके लिए हमें निमन रखना चाहिए। – रसायन की प्रकृति का पता लगाकर – रसायन की द्रव रूप प्रकृति का पता लगाकर – सभी ज्वलनशील पदार्थों को एक साथ भण्डार – रसायनों को बाहरी वातावरण के साथ प्रतिक्रिया – रसायनों के स्टोरेज में अग्निरोधी व्यवस्था – एक दूसरे में रासायनिक क्रिया करने वाले पदार्थों को अलग रखना रिसाव की प्रकृति में तुरन्त कार्यवाही करना- types of hazard

इसके लिए निम्न मुख्य तरीके (Important ways):

भण्डारण के स्थान पर हवा के आवागमन की व्यवस्था होना- विस्फोटक व ज्वलनशील पदार्थों में इनको नियन्त्रण की व्यवस्था।-जिस धरातल पर रखा गया व धरातल रासायनिक प्रतिक्रिया से अप्रभावित हो।- बिजली और रोशनी की व्यवस्था के चारों और सुरक्षा प्रणाली स्थायित्व करना जो कि अग्निरोधी व विस्फोट रोधी हो।- भण्डारण से पहले उनकी प्रकृति का अध्ययन करना।- एक दूसरे से प्रतिक्रिया करने वाले रसायनों से दूरी रखना। -निरीक्षण करना।- भण्डारण में तैनात कर्मचारी को प्रशिक्षण।- भण्डारण में जो व्यक्तिगत रूप से लगा है उसे अग्नि शमन-भण्डारण में रसायनों की लेबलिंग करना। – भण्डारण में ड्रम की स्थापित करना।-ज्वलनशील पदार्थों को संयंत्र से दूर रखना। – उष्मा से प्रभावित रसायनों को सूर्य की उमा से दूर रखना। – जो पानी से प्रभावित हो उसे खुली हवा में रखना।-रेडियो रोधी पदार्थों को सिरे की दिवारों वाले भण्डारण में रखना।

3- मानवीय खतरे ERGONOMICS HAZARDS

मानव व मशीन की अनुकूलित व्यवस्था है इसके अन्तर्गत उद्योगों में कार्य की प्रकृति के अनुसार और उस पर मानवीय कार्य सेसम्बन्धित संतुलन की व्यवस्था स्थापित की जाती है। जिसमें मशीनों की कार्य प्रणाली यांत्रिक व्यवस्था, कार्य विधि और संयंत्र व मशीनों के स्थापना व निर्माण व्यवस्था आदि का अध्ययन किया जाता है। 1.मशीन व उपकरण की रचना प्रणाली व कार्य के अनुसार 2. संयंत्र व कार्य स्थल पर यांत्रिक प्रणाली के अनुसार 3. उचित कार्य प्रणाली के अनुसार – hazard

Ergonomics से होने वाले खतेरे :

  1. कार्य करते समय उचित उपकरणों का इस्तेमाल नहीं करने से कार्य में देरी, व्यक्तिगत नुकसान आदि। 2. उचित प्रकार से मशीन व संयंत्र की रचना कार्य के अनुसार न होना।

नियन्त्रण (Control):-

 उचित उपकरणों का इस्तेमाल कर हम निम्न खतरों को रोक सकते है  – प्रबन्धन में सुरक्षा सम्बन्धी कार्य। -सुपरवाईजर के सुरक्षा सम्बन्धी कार्य ।- श्रनिकों को कार्य के दौरान सुरक्षा सम्बन्धी कार्य करते रहना चाहिये। 1. सुरक्षा सम्बन्धी सेमीनार मीटिंग या बैठक आयोजित करना। 2. उद्योगों व सुरक्षा समीतियों के लिए सुरक्षा कार्यबल गठित करना।-कार्य के बारे में उचित दिशा निर्देश देना। सुरक्षा सम्बन्धित विभिन्न प्रोत्साहन कार्य क्रम पुरस्कार आदि की व्यवस्था करना। 5. सुरक्षा सम्बन्धी प्रशिक्षण प्रदान करना।-कार्य के दौरान सुरक्षा के साधनों के बारे में समझाना। 7. उद्योग संयंत्र में उचित कार्य विधि स्थापित करना- list of industrial hazard

4- खतरे (Biological Hazards) :

किसी भी रासायनिक उद्योग या अन्य उद्योग में कुछ ऐसे खतेरे होते है, जो पानी, हवा खाने पीने की वस्तु के द्वारा अन्दर जा सकते। इन्हें हमे बायोलोजिकल हेजार्ड (जैविक खतरा) कहते है।  वस्तु, पीने के पानी हवा द्वारा यह कर्मचारियों या अन्य व्यक्तियों के शरीर में जा सकते है। इन्हें हम किसी अच्छा फिल्टर युक्त पानी इस्तेमाल करते है। दैनिक उपयोग में आने वाले पानी के सुरक्षा मापदण्ड आदि से जल का शुद्धी करण करना, ज्यादा रसायनों वाला हो तो अच्छे शुद्ध करके खेतों में लगाना।

वैज्ञानिक नियमों में पानी की परिपालना :

  1. पानी को छोड़ने से पहले शुद्ध करना। 2. पर्यावरण की जाँच करना और पायी गयी कमियों और खामियों को तुरन्त प्रभाव से लागू करना। पीने का पानी व उनसे होने वाले जैविक खतरे न हो। पीने का पानी पर्यावरण युक्त पानी में बेक्टीरीया, जीवाणु वीषाणु व वाईरस आदि के द्वारा पानी दुषित होता है। – hazard defination in hindi

प्रभावया नुकसान (Merits and demerits)

  • बीमारियां फैलाना। 
  • अगर मनुष्य पानी को पियेगा तो बिमार होगा।
  • अगर उस पानी को खेतों में लगायेंगे तो फसल पर प्रभाव पड़ेगा।।

Biological Hazards से बचाव या रोकथाम (Prevention from biological hazars):

  • पीने के पानी की समय-समय पर जाँच।
  • अलग नल की व्यवस्था करना।
  • पानी फिल्टर करना।
  • 50 व्यक्तियों से ज्यादा के लिए फिल्टरयुक्त पानी का इस्तेमाल।
  • ठण्डे पानी की व्यवस्था।
  • पानी निकासी की उचित व्यवस्था।
  • उचित खाद्यान्न प्रणाली विकसित करना।
  • कर्मचारी व व्यक्तिगत स्वारथ्य व्यवस्था करना।
  • केन्टीन में कार्यरत बच्चों को साफ कपड़े पहनाना, स्वास्थ्य ध्यान रखना।
  • कार्य क्षेत्र पर उचित सफाई व्यवस्था करना।
5- अभियांत्रिकी जोखिम (Mechanical Hazards)
  • मशीनों के संचालन के दौरान आपस में रगड़ लगना, टूट-फूट, आपस में घर्षण, मशीनों का सही ढंग से रखरखाव न होना और सही ढंग से रोपान न होना। खतरा विभिन्न औजार व उपकरण से दुर्घटना
  • विभिन्न उद्योगों में लगी मशीन के कारण
  • बेल्डींग व कटींग के समय
  • सुरक्षा ट्रनिंग का अभाव
  • कार्य पूर्व ट्रेनिंग का अभाव
  • पी.पी.ई. का अभाव
  • मशीन का उचित मार्गदर्शन का अभाव
  • समय-समय पर मशीन या पुजों की जाँच का अभाव

कंट्रोल (control)

  • पर्यावरण खतरे में वर्षा का पानी, नहरों का पानी व उद्योगों का धुंआ, रसायनों से पर्यावरण पर प्रभाव, औद्योगिक गैसों से प्रभाव आदि से पर्यावरण पर काफी खतरे उत्पन्न होते है जिन्हें हम पर्यावरण खतरे कहते
  • मशीनों का सही रखरखाव। 
  • मशीनों की अच्छी गाडींग व्यवस्था।
  • मशीनों की पास आने जाने का रास्ता।
  • पी.पी.इ का इस्तेमाल।
  • प्रशिक्षण की व्यवस्था।

बचाव :-फेक्ट्रीयों की सही स्थापना, सही गैस प्रणाली का उपयोग, वर्षा के पानी में जो रसायनों का मिले होने से उस पानी का सही तरीके से उपयोग।

6- सामाजिक खतरे (Social Harards)

सामाजिक खतरे वह खतरे जो कि उद्योग के द्वारा या किसी व्यक्ति की गलत प्रवृति से अन्य किसी लाभ हानि से जो समाज पर प्रभाव पड़ता है उसे सामाजिक खतरे कहते है। जैसे किसी कम्पनी के घाटे का सीधा समाज पर प्रभाव पड़ेगा। – what is industrial safety

 बचाव : सही व अच्छी कार्य प्रणाली व व्यक्ति की अच्छी मानसिक व्यवस्था से । हमइन्हें रोक सकते है।

7. पर्यावरण खतरे (Environment Hazards):

पर्यावरण क्षरण पर्यावरण में संसाधनों जैसे मृदा, जल तथा वायु का हास होता है, जिसके फलस्वरूप परिस्थितिकी का विनाश तथा वन्य जीवों का विलुपन हो रहा है। High Level Hrreat Panel of the united state ने चलाया है कि पर्यावरण क्षरण वर्तमान समय में 10 प्रमुख समस्याओं में से एक है। इस समस्या पर विश्व संसाधन संस्थान (WRI), संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण योजना (UNEP), संयुक्त राष्ट्र विकास योजना तथा वर्ल्ड बैंक ने संयुत रिपोर्ट तैयार की है। पर्यावरण क्षरण का मुख्य कारण प्रदूषण है। मानवीय क्रियालापों में वृद्धि के कारण पृथ्वी पर हरियाली में दिन प्रतिदिन कमी आ रही है। ध्वनि वाहन तथा औद्योगिक प्रदूषण निरंतर बढ़ रहा है, जिससे मानव के अस्तित्व पर खतरा बढ़ रहा है। आधुनिक उपकरण जैसे रेफ्रीजरेटर वाहन, कारें आदि प्रदूषण के प्रमुख कारण है। इनसे उत्सर्जित धुएं के कारण वातावरण में co2की मात्रा में वृद्धि हो रही है, जिससे वैश्विक तापमान मे वृद्धि होने के कारण ग्लेशियरों का पिघलना तीव्र हो गया है, जिससे तटीय इलाकों के पानी में डूबने का खतरा पैदा हो गया है। इसके फलस्वरूप जीवों तथा पादपों की कई प्रजातियां विलुप्त होकर मानव जाति के लिए खतरा पैदा कर दिया है।  पर्यावरण ने सर्वप्रथम औजोन परत का पता लगाकर वैश्विक समुदाय को यह आगाह किया कि यह परत विषैली गैसों के अत्यधिक उत्सर्जन से दिन-प्रतिदिन नष्ट होने की तरफ बढ़ रही है, जिससे वह दिन दूर नहीं जब सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणों के कारण पृथ्वी पर मानव का अस्तित्व ना-मुमकिन हो जाएगा। इसके पश्चात दुनिया के अग्रणी देशों ने संयुक्त राज्य अमेरिका के (जो कार्बन उत्सर्जन में प्रथम स्थान पर है) के साथ मिलकर “क्वोटी संधि’ का निर्माण किया जो 16 फरवरी, 2005 को प्रभावी हुआ, जिसमें दुनिया के सभी देशों द्वारा औद्योगिक प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सहमति जताई गई। वर्तमान समय में दुनिया के सभी देश प्रदूषण के संबंध में अत्यंत ही चिंतित हैं।  पृथ्वी के विकास के साथ ही प्रकृति पर्यावरण से संपन्न थी, जो पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व तथा मानव समाज के विकास में निरंतर योगदान दे रहा है। उस समय से पर्यावरण में मुख्य रूप से दो घटक पाए जाते हैं। (i) भौतिक पर्यावरण – इसमें रसायनिक तथा भौगोलिक क्षेत्र शामिल है। (ii) जैविक पर्यावरण – जिसमें प्राणी जगत तथा पादक सम्मिलित है, जिन्हें संयुक्त रूप से बायोस्कीयर (जीवमंडल) कहा जाता है। – industrial safety 

Red More..

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